मन की भड़ास
स्कोप नहीं है।
यह वाक्य जाने कहां-कहां सुना है। लगभग 3 साल पहले की
बात है। इंदौर में सानंद संस्था की ओर से एक अलग तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया
गया था। मूलतः इंदौर के, लेकिन अब अमरीका निवासी किन्ही सज्जन की प्रस्तुति थी। ये
महानुभाव नासा को अभियांत्रिकी सेवाएं देने वाले एक संगठन के कर्मचारी हैं। ख़ुद
भी इंजिनीयर हैं। नाम नहीं बताऊंगा, और उसकी दो वजहें हैं। एक, उनका नाम अब याद
नहीं है। दो, नाम याद रखने लायक संवाद नहीं हुआ था उनके साथ।
इंदौर में प्रीतमलाल दुआ सभागृह में उनका कार्यक्रम
था। उन्होंने नासा के अंतरिक्ष कार्यक्रमों से संबंधित कुछ वीडियो दिखाए। कुछ
जानकारी अपने संगठन के कार्य की भी दी। मेरे साथ मेरी बेटी थी। उसने प्रस्तुति के
बाद की प्रश्नोत्तरी के समय एक प्रश्न पूछा जिसका जवाब उन्होंने कुछ गोल-मोल ही
दिया। मेरी बेटी में कुछ मेरे दुर्गुण भी हैं। उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं होते हुए
भी उसने और खोद कर पूछना ठीक नहीं समझा।
कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा हुई। अन्य कई लोगों की
तरह हम दोनों भी वक्ता से मंच के पास जा कर मिले। वहां मैंने नमस्कार-चमत्कार के
बाद उनसे मेरी बेटी का परिचय कराते हुए कहा कि इसे आगे चल कर एस्ट्रोफिजिक्स यानि
खगोल-भौतिकी सीखने की अभिलाषा है। उनके श्रीमुख से अमर वाक्य निकला था,
"एस्ट्रोफिजिक्स में स्कोप नहीं है।" मैं अपनी बेटी को साथ ले कर उल्टे
पांव लौट आया।
यह स्कोप नहीं होने की बीमारी इतने अच्छे क्षेत्रों को
क्यों हो जाती है? कोई बच्चा (आपके भी परिचय-वृत्त में होगा/होगी) नृत्य सीखना
चाहता है, और उसे इस समय यही इच्छा है कि ज़िंदगी भर वही किया जाए। स्कोप नहीं है।
ये तीन शब्द उसके जीवन से उस एक कला को हमेशा के लिए दूर करने के लिए काफ़ी हैं।
आज दुनिया भर का ज्ञान व्हॉट्सएप और फ़ेसबुक पर मुफ़्त मिलता है। ज्ञान की उन
बातों में एक बात प्रमुखता से सामने आती है – Be Yourself. इसका क्या अर्थ है? मेरी बेटी के स्कूल का बोध-वाक्य तो इससे भी शानदार
है – Know Thyself. अपने-आप को जानिए। किस तरह? यदि मैं
नृत्य सीखना चाहता हूं, तो क्या उसके द्वारा मैं अपने-आप को नहीं जान सकता?
मेरी बेटी के स्कूल में (ऐसा मैंने सुना है) कि 10वीं
पास कर रहे सब बच्चों से कह दिया गया है कि 11वीं में ऐच्छिक विषय शारीरिक शिक्षा
यानि फिजिकल एजुकेशन (पी.ई.) ही लें। यह कैसा तरीका है Know
Thyself को साकार करने का? क्या दूसरे ऐच्छिक विषय, जैसे कम्प्यूटर साइंस, उद्यमिता (आँत्रप्रिन्योरशिप) या कोई और विषय इस लायक नहीं हैं कि उन्हें पढ़ा जाए? पी.ई. बहुत "स्कोरिंग" विषय है। तो क्या स्कोर से बढ़ कर कुछ नहीं? हम बच्चों को सब कुछ देना चाहते हैं –
अच्छी शिक्षा, अच्छे संस्कार (पता नहीं इसका क्या मतलब है) – लेकिन क्या हम उन्हें
स्वतंत्रता देने के बारे में सोचते हैं? क्या स्वतंत्रता देने से वास्तव में बच्चे
बिगड़ते हैं? क्या इस ख़तरे के बावजूद यदि हम स्वतंत्रता दें, तो उसके परिणाम
स्वीकार करने की हिम्मत हममें है? और बिगड़ते हैं का क्या अर्थ है?
संस्कार से याद आया। मैं कई अभिभावकों को लगभग रोज़ाना
सड़क पर दो पहिया वाहन पर बच्चों के साथ तीन या ज्यादा सवारी किए हुए देखता हूं।
आप भी देखते होंगे। उस हालत में वे सड़क पर ग़लत दिशा से वाहन भी चलाते हैं और ट्रैफिक सिगनल का भी उल्लंघन करते हैं। आप न
सिर्फ नियम तोड़ रहे हैं, और न सिर्फ अपनी और अपने बच्चों की जान जोखिम में डाल
रहे हैं, आप बच्चों को यह संदेश भी दे रहे हैं कि ऐसा करना जायज़ है। बिगड़ा हुआ
कौन है?
तो बात हो रही थी स्कोप की। अब लगता है कि "स्कोप
नहीं है" की बात करने में भी कोई स्कोप नहीं है।
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